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सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा-Prasoon Joshi (प्रसून जोशी)

 इस रचना का सबसे प्रमुख भाव देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण है। देश की सीमाओं, संस्कृति, परंपराओं और एकता की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व माना गया है।

कविता की पंक्ति में यह भावना दिखाई देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, देश के अस्तित्व, सम्मान और अखंडता से समझौता नहीं किया जाएगा।

यह केवल युद्ध या सीमा की रक्षा की बात नहीं करती, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी, एकता और सामूहिक चेतना की भावना को भी सामने लाती है।

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने भाषणों में देशभक्ति से भरपूर यह कविता पढ़ते हैं। इस गीत को प्रसून जोशी ने लिखा है।

सौगंध मुझे इस मिट्टी की,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा।

मेरी धरती मुझसे पूछ रही,
कब मेरा कर्ज़ चुकाओगे,
मेरा अम्बर मुझसे पूछ रहा,
कब अपना फर्ज़ निभाओगे
मेरा वचन है भारत माँ को,
तेरा शीश नहीं झुकने दूंगा,

सौगंध मुझे इस मिट्टी की,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा।

वो लूट रहे हैं सपनों को,
मैं चैन से कैसे सो जाऊँ,
वो बेच रहे अरमानों को,
खामोश मैं कैसे हो जाऊँ,
हाँ मैंने कसम उठाई है,
मैं देश नहीं बिकने दूंगा,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
सौगंध मुझे इस मिट्टी की,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा।

वो जितने अंधेरे लाएंगे,
मैं उतने सूर्य उगाऊँगा,
वो जितनी रात बढ़ाएंगे,
मैं उतने उजाले लाउंगा,
इस छल फरेब की आँधी में,
मैं दीप नहीं बुझने दूंगा,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
सौगंध मुझे इस मिट्टी की,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा।

वो चाहते हैं जागे न कोई,
ये रात ये अंधकार चले,
हर कोई भटकता रहे यूंही,
और देश यूंही लाचार चले,
पर जाग रहा है देश मेरा,
पर जाग रहा है देश मेरा,
हर भारतवासी जीतेगा,
हर भारतवासी जीतेगा,

मांओं बहनों की अस्मत पर
गिद्ध नज़र लगाए बैठे हैं
हर इंसां है यहां डरा-डरा
दिल में खौफ़ जमाए बैठे हैं
मैं अपने देश की धरती पर
अब दर्द नहीं उगने दूंगा
मैं देश नहीं रुकने दूंगा 
सौगंध मुझे इस मिट्टी की,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा।

अब घड़ी फ़ैसले की खाई
हमने है कसम अब खाई
हमें फिर से दोहराना है
और ख़ुद को याद दिलाना है
ना भटकेंगे न अटकेंगे
कुछ भी हो इस बार
हम देश नहीं मिटने देंगे 
सौगंध मुझे इस मिट्टी की,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं मिटने दूंगा,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा।

निष्कर्ष

“सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा” देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति संकल्प की भावना को व्यक्त करने वाली प्रभावशाली पंक्ति है। इसमें मातृभूमि के प्रति सम्मान, देश की अखंडता की रक्षा और राष्ट्र के लिए समर्पण का भाव दिखाई देता है।



इस पंक्ति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और प्रभाव है। कुछ ही शब्दों में यह अपने देश के प्रति जिम्मेदारी और अटूट प्रेम की भावना को सामने रखती है।

आज के समय में देशभक्ति का अर्थ केवल देश के लिए भावनात्मक लगाव नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना, समाज में सद्भाव बनाए रखना और देश के विकास में योगदान देना भी है।

यही इस पंक्ति का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है—देश के प्रति प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे कर्मों में भी दिखाई देना चाहिए।

अगर आपको देशभक्ति कविताएं, हिंदी साहित्य और प्रेरणादायक कविताएं पसंद हैं, तो इस लेख को अपने दोस्तों और साहित्य प्रेमियों के साथ जरूर साझा करें।

आपको “सौगंध मुझे इस मिट्टी की” पंक्ति का कौन-सा भाव सबसे ज्यादा प्रेरित करता है? नीचे कमेंट में जरूर बताएं।

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